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अगर मेरे खिलाड़ी से बात करनी है तो पहले मुझसे बात करो, यह है रवि शास्त्री का एटीट्यूड: पूर्व सिलेक्टर

मुंबई के पूर्व खिलाड़ी और बीसीसीआई के पूर्व सिलेक्टर रहे जतिन परांजपे ने रवि शास्त्री के निडर स्वभाव की कहानी को किया है बयां.

user-circle cricketcountry.com Written by India.com Staff
Published: Jun 02, 2022, 04:36 PM (IST)
Edited: Jun 02, 2022, 04:36 PM (IST)

क्रिकेट का मैदान हो या फिर कॉमेंट्री बॉक्स, रवि शास्त्री भारतीय खिलाड़ियों का समर्थन करने से कभी पीछे नहीं हटते. वह अपने दमदार व्यवहार के चलते अकसर सुर्खियों में भी खूब रहते हैं. इन दिनों उन्होंने एक कमर्शियल ऐड क्रेड पर जो अपना नया रूप दिखाया है वह उसके लिए भी खूब चर्चा में हैं. इस बीच शास्त्री का एक अनसुना किस्सा भी सामने आया है, जिसे जानकर आपको उन पर और गर्व होगा.

यह किस्सा साझा किया है बीसीसीआई के पूर्व सिलेक्टर जतिन परांजपे ने. उन्होंने बताया कि शास्त्री मैदान पर अपने खिलाड़ियों का पुरजोर समर्थन करते थे और वह विरोधी टीम के खिलाड़ी हों या फिर कोच कोई उनकी टीम के किसी खिलाड़ी को कुछ कह नहीं पाता था.

दरअसल परांजपे ने अपने खेल के दिनों का एक किस्सा साझा किया है. इस पूर्व खिलाड़ी ने रवि शास्त्री (Ravi Shastri) की कप्तानी में ही मुंबई के लिए अपना रणजी ट्रॉफी डेब्यू किया था. परांजपे का डेब्यू मैच हरियाणा के खिलाफ था और यहां रवि शास्त्री ने अपने टीम के खिलाड़ियों का मजबूती से पक्ष लिया था.

रेडीफ.कॉम से बात करते हुए परांजपे ने कहा, ‘मुझे शास्त्री के साथ एक लम्हा याद है, जब हम हरियाणा के खिलाफ हरियाणा में रणजी ट्रॉफी मैच खेल रहे थे. इस बीच हरियाणा के तब के कोच सरकार तलवार ने मुंबई के बल्लेबाज पारस म्हाम्ब्रे को कुछ कह दिया. इस बीच रवि शास्त्री उनके बीच में आ गए और उन्होंने कहा कि अगर मेरे किसी खिलाड़ी से बात करनी है तो पहले मुझसे बात करनी होगी. लीडरशिप उनके स्वभाव में ही थी.’

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इसके बाद शास्त्री अपने इसी स्वभाव से भारतीय टीम के लिए क्रिकेट खेला और फिर क्रिकेट कॉमेंट्री में भी इसी लय को बरकरार रखा. बाद में शास्त्री भारतीय टीम के कोच भी बने तो उन्होंने भारतीय टीम में यही नेतृत्वकर्ता का गुण टीम में विकसित किए.